ॐ Deva DarshanTemple guide to India

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माँ कामाख्या मंदिर

नीलाचल पहाड़ी, गुवाहाटी, कामरूप महानगर ज़िला, असम · देवी कामाख्या (शक्ति), जिनकी पूजा प्राकृतिक झरने में योनि के आकार के पत्थर के रूप में होती है; परिसर में दस महाविद्याओं के मंदिर भी हैं

प्रमुख शक्तिपीठ और तंत्र साधना का केंद्र, ब्रह्मपुत्र के ऊपर पहाड़ी पर – अंबुबाची मेले के लिए प्रसिद्ध।

कामाख्या भारत का सबसे महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है, जहाँ माना जाता है कि देवी सती की योनि गिरी थी। यहाँ कोई मूर्ति नहीं है: देवी की पूजा भूमिगत गुफा में पत्थर की एक दरार के रूप में होती है, जो प्राकृतिक झरने से नम रहती है। वर्तमान मंदिर 1565 में कोच राजा नरनारायण ने विशिष्ट नीलाचल शैली में फिर से बनवाया। हर जून में अंबुबाची के दौरान मंदिर तीन दिन बंद रहता है, जब माना जाता है कि देवी रजस्वला होती हैं, और पहाड़ी पर लाखों श्रद्धालु और साधु इकट्ठा होते हैं।

मंदिर का समय

दर्शन के प्रकार और शुल्क

सेवाएं और शुल्क

विशेष दर्शन टिकट – ₹501 प्रति व्यक्ति

प्रतिदिन, सुबह और दोपहर के स्लॉट (द्वार सुबह 8 – दोपहर 1 बजे और दोपहर 2:30 – शाम 5:15 बजे)

केवल ऑनलाइन mkdonline.co.in (आधिकारिक पोर्टल) पर। तारीख़ और स्लॉट चुनें, पहचान-पत्र भरें और भुगतान करें। वही फ़ोटो पहचान-पत्र साथ रखें।

'VIP' टिकट बेचने वाली अन्य वेबसाइटों और एजेंटों से सावधान रहें; मंदिर अनधिकृत साइटों के प्रति चेतावनी देता है।

मंदिर के पुरोहित (पंडा) द्वारा पूजा – अलग-अलग – पुरोहित से तय करें; दुकानों में बिकने वाला चढ़ावा अलग

प्रतिदिन, मंदिर के समय में

मौके पर पुरोहित के साथ; पहले दक्षिणा और उसमें क्या शामिल है, यह तय कर लें।

कुमारी पूजा – अलग-अलग

बड़ी पूजाओं का भाग, विशेषकर दुर्गा पूजा में; अनुरोध पर भी

मंदिर के पुरोहित के माध्यम से।

अन्न भोग प्रसाद – निःशुल्क (वितरण) / दान का स्वागत

प्रतिदिन, दोपहर 1:00 बजे के चढ़ावे के बाद

बुकिंग नहीं; वितरण स्थल मंदिर में पूछें।

अंबुबाची महायोग – निःशुल्क

आषाढ़ (लगभग 22 – 26 जून); 2026: प्रवृत्ति 22 जून रात 9:26 बजे, निवृत्ति 26 जून सुबह

बुकिंग नहीं। जूते-चप्पल पहुँच मार्ग पर बने शिविरों में छोड़ने होते हैं; व्यस्त दिनों में विशेष दर्शन बंद रहता है।

अत्यधिक भीड़; पुनः खुलने के बाद लंबी प्रतीक्षा की योजना बनाएँ।

बलि (पशु बलि का चढ़ावा) – अलग-अलग

प्रतिदिन, विशेषकर मंगलवार/शनिवार और दुर्गा पूजा में

पुरोहित के माध्यम से।

केवल जानकारी के लिए; कई श्रद्धालु केवल फूल चढ़ाते हैं। यदि आप यह नहीं देखना चाहते तो उस क्षेत्र से बचें।

दर्शन बुकिंग कैसे करें

विशेष दर्शन (₹501) और निःशुल्क सामान्य-कतार टोकन केवल मंदिर के आधिकारिक पोर्टलों पर बुक होते हैं।

विशेष दर्शन बुक करें

  1. maakamakhya.org पर जाएँ और mkdonline.co.in (विशेष दर्शन) या mkdonlinegenq.in (निःशुल्क सामान्य कतार) का लिंक खोलें।
  2. तारीख़ और सुबह या दोपहर का स्लॉट चुनें।
  3. हर श्रद्धालु का नाम, उम्र और फ़ोटो पहचान-पत्र का विवरण भरें।
  4. प्रति व्यक्ति ₹501 ऑनलाइन भुगतान करें (विशेष दर्शन) और टिकट डाउनलोड करें।
  5. उस दिन वही फ़ोटो पहचान-पत्र और टिकट लेकर जल्दी मंदिर के द्वार पर पहुँचें; जूते-चप्पल और थैले जमा करें।

ड्रेस कोड

शालीन पारंपरिक वस्त्र उचित हैं (महिलाओं के लिए साड़ी/सलवार, पुरुषों के लिए धोती या पतलून)। भीतर चमड़े की वस्तुएँ और जूते-चप्पल की अनुमति नहीं।

मंदिर के नियम

जाने का सबसे अच्छा समय

सुहावने मौसम के लिए अक्टूबर से अप्रैल। उत्सवों के लिए अंबुबाची (जून) और दुर्गा पूजा (सितंबर/अक्टूबर), जब बहुत भारी भीड़ होती है।

कैसे पहुंचें

उत्सव

अंबुबाची मेला (लगभग 22 – 26 जून)

देवी का वार्षिक रजस्वला काल; मंदिर तीन दिन बंद रहता है, फिर भारी भीड़ के बीच पुनः खुलता है।

मनसा पूजा और देवधनी उत्सव (अगस्त (श्रावण संक्रांति से, 3 दिन))

नाग देवी मनसा की पूजा, जिसमें नटमंदिर में देवधा भाव-समाधि में नृत्य करते हैं।

दुर्गा पूजा (पाखुआ पूजा) (सितंबर/अक्टूबर, लगभग पखवाड़ा)

आश्विन की कृष्ण नवमी से शुक्ल नवमी तक; देवी का महास्नान और बलि।

पुहान बिया (दिसंबर/जनवरी (पौष))

देवी कामाख्या का कामेश्वर के साथ विधिवत विवाह।

वासंती पूजा और दुर्गा देउल (मार्च/अप्रैल)

दुर्गा की वसंत पूजा और झूला उत्सव।

महा शिवरात्रि (फ़रवरी/मार्च)

उमानंद और कामाख्या में पूजा।

सुझाव

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कामाख्या में VIP/विशेष दर्शन कितने का है?

₹501 प्रति व्यक्ति, केवल ऑनलाइन mkdonline.co.in पर बुक होता है। कुछ व्यस्त दिनों में यह बंद रहता है।

क्या मंदिर में कोई मूर्ति है?

नहीं। देवी की पूजा भूमिगत गुफा में पत्थर की योनि-आकार की दरार के रूप में होती है, जो झरने से नम रहती है।

अंबुबाची के लिए मंदिर कब बंद रहता है?

जून के अंत में तीन दिन। 2026 में यह 22 जून की रात बंद हुआ और 26 जून की सुबह खुला।

कतार कितनी लंबी होती है?

शांत सप्ताह के दिन की सुबह 1 घंटे से लेकर उत्सव के दिनों में 8–10 घंटे तक, और अंबुबाची के बाद इससे भी अधिक।

क्या पशु बलि अब भी होती है?

हाँ, यह मंदिर की शाक्त परंपरा का भाग है, विशेषकर दुर्गा पूजा में। कई श्रद्धालु केवल फूल चढ़ाते हैं।

मंदिर के समय क्या हैं?

सामान्य दिनों में द्वार सुबह 8:00 – दोपहर 1:00 बजे और दोपहर 2:30 – 5:15 बजे खुलते हैं; आरती शाम 7:30 बजे।

यह गाइड Deva Darshan द्वारा अंग्रेज़ी से अनुवादित है। अंग्रेज़ी में पूरी गाइड